"क्या नारीवाद सचमुच पश्चिम का उपहार है, या हमने खुद उसे भुला दिया?"
जब आप "Indian Thoughts on Feminism" पढ़ेंगे, तो यह प्रश्न आपके भीतर गूंजेगा। प्रो. पवन सिन्हा 'गुरुजी' द्वारा संपादित यह पुस्तक सनातन परंपरा में नारीवाद की गहराई को उजागर करती है। वेदों से लेकर आज तक, भारतीय स्त्रियाँ कैसे समानता और गरिमा की प्रतीक रही हैं—यह किताब उसी ऐतिहासिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक यात्रा का दस्तावेज़ है।
- यह किताब सनातन नारीवाद की विचारधारा को नये दृष्टिकोण से रखती है, जिससे बहुत से लोग अब तक अनजान हैं।
- इसमें विश्वभर के विद्वानों द्वारा लिखे गए अध्याय शामिल हैं जो आपको एक अनसुनी, लेकिन ज़रूरी सच्चाई से जोड़ते हैं।
Indian Thoughts on Feminism
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